कही से काश तुम...💔💔
कहीं से काश तुम "आवाज़" देते ।
"ग़मों" को हम कोई तो "साज़" देते ।तमन्ना ये भी "दिल" में है,
तुम्हे हम, तुम्हारे नाम से "आवाज़" देते ।
बिखरना तय है फिर भी "मुस्कराना,
गुलों को और क्या "अंदाज़" देते ।
बहुत "तौहीन" होती "आँसुओं" की,
सदाओं को अगर "अल्फाज़" देते ।
बिखरना तय है फिर भी "मुस्कराना,
गुलों को और क्या "अंदाज़" देते ।
बहुत "तौहीन" होती "आँसुओं" की,
सदाओं को अगर "अल्फाज़" देते ।
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