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Showing posts from August, 2024

मैने उसे लिखा अखरी खत...💔💔

 वो भी शायद रो पड़े "वीरान"🏚️ कागज़ देख कर,,, मैने उसको "आख़िरी ख़त" में लिखा कुछ भी नहीं....!!💔💔

बाबा पुराने दौर की...🏚️🏚️🏚️

बाबा पुराने "दौर"🏚️ की कुछ तो बात🧐 बताइए,  ऐसा सुना है... होती थी क़ीमत "ज़बान"😋 की !

दिल ऐसे मुब्तला हु़वा

"दिल"❤️ ऐसे "मुबतला"🧐 हुआ तेरे मलाल में,  "जुल्फे"👱‍♀️ सफेद हो गई "19 साल" में,  ऐसे वह "रो रहा"😭 था मेरा हाल देखकर,  आया हुआ हो जैसे किसी "इंतकाल"⚰️ में।

समय और समझ दोनो

"समय"⏰ और "समझ"🤔 दोनों एक साथ..! बस "किस्मत"🧐 वालों को ही मिलती हैं,  क्योंकि अक्सर "समय पर समझ" नहीं आती..!  और "समझ🤔 आने पर "समय"⏰ निकल जाता है..।

जो लड़की हर किसी से..🥺💔

जो "लड़की"🙍 हर किसी से बात करे वो कभी "एक"👫 की नहीं हों सकती..!!

Ye बारिश भी तुम सी

कभी "बेपनाह" बरसी, कभी गुम सी है  ये बारिश भी "कुछ कुछ" तुम सी है।

हम तो केवल जरूरत...💔🥺🥀

 हम तो केवल "जरूरत"🥺 थे  जरूरी तो कोई "और"💔🥀 था..!

बस इतना कहना है🤫🤫

बस इतना "कहना"🤫 है कुछ "लोगों"👨‍❤️‍👨 से  यहाँ मिल गए हो, "ऊपर"☝️ मत मिलना..!

हमें न बताएं...💔🥀🥺

 हमें न बताइए ---  के "महफिल" में "इंतजाम" क्या हैं,,,,,  हमने उड़ती "दावतों" में बिखरता "रायता" देखा हैं...!!

ना हथियार से मिलते....⚔️

ना "हथियार"⚔️ से मिलते हैं  ना "अधिकार"🤝 से मिलते हैं "दिलों"💞 पर कब्जे बस  अपने "व्यवहार"😘 से मिलते हैं..... ❣️।

चलो आज कुछ अपनी मोहब्बत...💞

  चलो आज कुछ अपनी "मोहब्बत"💞 के बारे में लिखा जाए, में "कलम"✒️ बन जाऊ और तू उसकी "स्याही"🧉 बन जाए.....❤️🙂🌺✨💫।                          

जवानी के दिन चमकीले.....

"जवानी" के दिन "चमकीले" हो गए.! "हुस्न" के तेवर "नुकीले" हो गए .! हम "इज़हार" करने से रह गए .! उधर उनके "हाथ" पीले हो गए।

अभी खासी अभी नजला...!

 अभी "खासी"🥱 अभी "नजले"😪 के कुछ आसार रहने दे..! "दवाओं"💊 से अभी मुझको दो चार रहने दे.! "पड़ोसन"🧝 रोज आती हैं, "तबियत" पूछने मेरी.! "इलाही"🤲 और कुछ दिन तू मुझे "बीमार"😤 रहने दे।

सर झुकाओगे तो...

 सर "झुकाओगे"😓 तो पत्थर "देवता" हो जाएगा..! इतना मत "चाहो"🤗 उसे वो "बेवफा"💔 हो जाएगा..।

में आरजू तो नही हूं मगर

 में "आरजू"🥺 तो नही हूं मगर तू "पाल" के देख..! "मोहब्बतों"💞 में कोई "रास्ता"🛤️ निकाल के देख..! में अपने "दोनो"🪙 तरफ "एक सा"🪙 हूं तेरे लिए..! किसी से "शर्त"🤝 लगा, फिर मुझे "उछाल"🤹‍♂️ के देख.।

मेरे गुरुर का नशा

 मेरे "गुरुर"😎 का "नशा"🍷 अगर कोई उतार सके..! हैं कोई "जितने"🏆 वाला जो मुझसे "हार"😓 सके..! मुझे एक ऐसे "बदन"🏋️ की "असद" जरूरत है..! जो मेरी "रूह"💗 से उसका "बदन" उतार सके..।

बना चुका हु में मोहब्बत

 बना चुका हु में "मोहब्बत"💔 के दर्द की दुआ.! अगर किसी को चाहिए तो मुझ से "राब्ता"🗣️ करे.! मेरी "दुआ"🤲 है और एक तरह से "बद्दुआ" भी.! खुदा तुम्हे तुम्हारे जैसी "बेटीयां"👯 अता करे.।

ये दुख अलग है की

 ये "दुख"🥺 अलग है की उससे में दूर हो रहा हु..! ये गम "जुदा"💔 है की वो खुद मुझे दूर कर रहा है..! तेरे "बिछड़ने"💔 पे लिख रहा हु में "ताजा" गजले..! ये तेरा "गम"🥺 है जो मुझे "मशहूर"😎 कर रहा है..।

रिश्ता बनाना ही तो

"रिश्ता"🤝 बनाना है तो "तारीफ"👌 करना सीखो...  और "खत्म"💔 करना है तो "सच"😒बोलना सीखो...।

जिन्दगी यूं भी गुजरी जा...

 जिंदगी यूं भी "गुजरी"🥺 जा रही है.! जैसे कोई "जंग"🥷 हरी जा रही है.! जिस जगह पहले के "जख्मों"🧐 के निशान है.! फिर वही पे "चोट" 🤕मारी जा रही है.।

मैने जो सोच रखा है

 मैने जो कुछ भी "सोचा"🤔 हुवा है  मैं वो "वक्त"⌚ आने पे कर जाऊंगा..! और तुम मुझे "जहर"🍶 लगते हो और  में किसी दिन तुम्हे "पी"🍷 के मर जाऊंगा।

Kuch lut gaya kuch

"कुछ लुट"🥷 गया "कुछ लुटा"🍻 दिया..! "कुछ मिट"🏚️ गया "कुछ मिटा"💔 दिया..! "जिंदगी"😥 ने कुछ यूं "अजमाया"🧐 मुझे..! "कुछ छीन" 🥵गया "कुछ गवा"😎 दिया..।

Itna majboor मत कर

 इतना "मजबूर"😔 ना कर की "बात"👨‍❤️‍💋‍👨 बनाने लग जाए..! हम तेरे सर की "कसम"🤞 झूठी खाने लग जाए..! में अगर अपनी "जवानी"🏋️ के सुना दी किस्से..! ये जो लौंडे है मेरे "पाव दबाने"🦵 लग जाए..।

Mohbbat me jo sun रखा था

"मोहब्बत" 💔 में जो सुन रखा था वैसा कुछ नहीं होता। की इसमें "बंदा"👤 अंदर ही अंदर मरता है ज्यादा कुछ नहीं होता।। ये फ़िल्मों में ही सबको "प्यार" ❤️ मिल जाता है आखिर में।  मगर सचमुच में इस "दुनिया"🌎 में ऐसा कुछ नहीं होता। मेरी गुरबत ने मेरी "दुनिया"🌎 छीन ली "सूफी" मेरी अम्मा तो कहती थी की "पैसा"💸 कुछ नही होता।।

Ye सच हैं आज कल

 ये सच है आज कल में जरा "मुश्किलों"😢 में हु..! बस "जिंदगी"💞 गुजारने की कोशिशों में हु..! और इस "दर्जा"📔 चूर कर दिया हैं "थकान"💆 ने..! खुद को "खबर"🥱 नही है में किन रास्तों 🛣️में हु..।

Ye mene kab kha ki...❤️🥀🥺

 ये "मैने"😐 कब कहा कि मेरे "हक़"🤲 में फैसला करे..! अगर वो मुझ से "खुश"☹️ नहीं ही तो मुझे "जुदा" 💔करे..! में उसके साथ जिस तरह गुजारता हूं "जिंदगी"🥺.!! उसे तो चाहिए की मेरे "शुक्र🙏" अदा करे..।

खुद उठाना पड़ता है

 खुद ही "उठाना"🧎 पड़ता हैं "थका टूटा"🥺 बदन अपना___ कि जब तक "सांसे"🗣️ चलती हैं कोई भी "कंधा"💪 नहीं देता..!

कभी किसी से...

 कभी किसी से "जिक्र ए जुदाई"🥺 मत करना..! इन "आसुंओ"😢 को कभी "रोशनाई" मत करना..! और जहां से जी ना लगे😒 तुम वही "बिछड़"💔 जाना..! मगर "खुदा" के लिए "बेवफाई"💘 मत करना..।

हर नोट बुक में कुछ

हर एक "नोटबुक"📒 के पीछे कुछ न कुछ "खास"❤️ लिखा है..! कुछ इस तरह से मेने तेरे मेरे "इश्क"💞 का "इतिहास"📔 लिखा है..! और अब तुम "दुनिया"🌏 में चाहे जहा भी रहो..! लेकिन मैने अपनी "डायरी"📓 में तुम्हे अपने "पास"🫂 लिखा है..।

सर जिसपे ना झुके

 सर जिसपे ना "झुक"🧎 जाए उसे "दर"🏚️ नहीं कहते..! हर "दर"🏚️ पे जो "झुक"🗣️ जाए उसे सर नही कहते..! क्या तुझको "जमाने"🌇 वाले "सितमगर"🥷 नही कहते..! कहते तो है लेकिन तेरे "मुंह"🥱 पर नही कहते..।

मंजिले लाख कठिन आए...🌇

 "मंजिले"🌇 लाख कठिन आए तो "गुजर"🚶 जाऊंगा..! हौसला "हार" के बैठूंगा🧎 तो "मर" जाऊंगा..! चल रहे थे जो मेरे "साथ"🤝 कहा है वो "लोग"🚶.! जो ये कहते थे की रास्ते🛣️ में "बिखर" जाऊंगा..! "दर ब दर"🥺 होने से पहले "सोचा"🤔 भी ना था..! में तुझे "राससी न आया तो "किधर"🌁 जाऊंगा।

इतने गुम सूम क्यों

 इतने "गुम - सुम"🥺 "चुप-चाप"🤫 क्यूँ बैठे हो..! कोई बात "दिल"💔 पर लगी या "दिल"❤️ हीं लगा बैठे हो..।

दिन में मिल लेते.....

"दिन"⛅ में मिल लेते कहीं "रात"🌌 जरूरी थी क्या..! बे नतीजा ये "मुलाकात"🫂 जरूरी थी क्या..! मुझसे कहते तो मैं "आंखों"👀 में बुला लेता तुम्हें..! "भीगने"☔ के लिए "बरसात"🌧️ जरूरी थी क्या..।

तू अगर मेरा नही हैं

"तू"👉 अगर "मेरा"🫂 नही है..! तो मुझे भी "जिद"💪 है...! मैं "तुझे"👉 भी कभी "तेरा"😡 नही होने दूंगा।

जिसके साथ सुकून बहुत...

जिसके साथ "सुकून"🛌 बहुत मिलता है.! उसके साथ "वक्त"⌛ बहुत कम मिलता है...।

सब कर लेना लम्हे...

सब कर लेना, "लम्हे"⌛ जाया मत करना...! गलत जगह पे "जज्बे"💪 जाया मत करना...! जिनकी "आंखें"👀 प्यारी बाते झूठी हो...! उनकी खातिर "सपने"🛌 जाया मत करना..।

उसकी हर याद में...😓

 उसकी हर एक "याद"😥 में "लज्जत"😌 होती है..! पहली "मोहब्बत"👩‍❤️‍💋‍👩‚ पहली "मोहब्बत"❤️ होती है..! तेरे साथ नही है तो "अहसास"😓 हुवा..! एक "तस्वीर"🖼️ की कितनी "कीमत"💰 होती हैं...।

पीते थे जिस के साथ..🥃

"पीते"🍻 थे जिस के साथ..! वो "साकी" बड़ा "हसीन"👸 था..! "आदत"🥃 लगा कर "ज़ालिम"🦹 ने..! "मयखाना"🍷 बदल लिया...।

मेरे जनाजे में एक कंधा

मेरे "जनाजे"🛌 में एक "कंधा"💪 मेरे "दोस्त"🫂 का रखना ‘क्योंकि‚ उसे पता है मैं किस "गली"🛣️ से "मुस्कुराकर"😊 जाता था ।

उम्र बिता दी हमने

"उम्र" बिता दी हमने बच्चो की "फिक्र" करने में बच्चे अब "व्यस्त" है हमारी कमियों का "जिक्र" करने मैं।

जगह की कैद नहीं थी...

 जगह की "कैद"⛓️ नही थी कोई कही बैठे..!  जहां "मकाम"🪑 हमारा था हम वही बैठे आमीरे "शहर"🌆 के आने पे "उठना"🧎 पड़ता हैं  लिहाजा अगली "साफों"🪑 में कभीं नहीं बैठे।

अब तो रविवार में भी कुछ

अब तो "रविवार"🍔 में भी कुछ यूँ "मिलावट"🍯 हो गयी है. कि "छुट्टी"🏖️ तो "दिखाई"🧐 पड़ती है लेकिन,  "सुकून"🛌के पल "नजर"👀 नहीं आते।।

दिलो की इमारतों में बंदगी....

 "दिलों"💔 की "इमारतों"🏙️ में "बंदगी"🤲 का नामो निशां नहीं..!  पर "ईंटों"🧱 के "मंदिर-मस्जिद"🕌में "ख़ुदा" ढूंढते हैं लोग।।।

कल तो कहते थे

 कल तो कहते थे की हम "बिस्तर"🛌 से उठ सकते नही...! आज "दुनिया"🌎 से उठे "ताकत" 💪कहा से आ गई।।।

अगर तुम हो तो...

 अगर तुम🙍 हो तो "घबराने"👽 की कोई बात थोड़े है ..! जरा सी "बूंदा बांदी"💧 है बहुत "बरसात"💦 थोड़े है ..! ये "राह–ए–इश्क"💞 है इसमें "कदम"👣 ऐसे ही उठते है ..! "मोहब्बत"❤️ सोचने🤔 वालो के बसकी बात थोड़े हैं।।।

इस मुफलिसी ने छीन ली

 इस "मुफलिसी" ने छीन ली "लज्जत" जुबान👅 से मेहनत का "फल"🍎 चखा भी तो "मीठा"🍫 नही लगा।

जनता हुं तुझे🙍

जनता हुं कि "तुझे"🙍 साथ 👫तो रखते हैं कई...! "पूछना" 🤔 था की तेरा "ध्यान"💆 भी रखता है कोई...!

बहुत मजबूर होके तेरी

बहुत "मजबूर"🥺 होकर मैं तेरी "आंखो"👀 से निकला "खुशी"🙂 में कोन अपने "मुल्क"🌎 से बाहर रहा है "गले मिलना"🫂 ना मिलना तो तेरी "मर्जी"😔 हैं लेकिन तेरे "चेहरे"🙁 से लगता है तेरा "दिल"❤️ कर रहा है।

वक्त ऐसे दीजिए

की "वक्त"⏱️ ऐसे न दीजिए, की "भीख"🙏 लगे..! बाकी जो आपको ठीक लगे।

हादसों की ज़द में हैं तो

"हादसों"🚨 की ज़द में हैं तो क्या "मुस्कुराना"🙂 छोड़ दें..!  "जलजलों"🤯 के खौफ से क्या "घर"🏚️ बनाना छोड़ दें??

सोचा था, तेरा ज़िक्र

 सोचा था, तेरा "ज़िक्र" न छेडूंगा शेर में,  फिर यूं हुआ कि शेर "मुक़म्मल" नहीं हुआ..!!