हमारा कत्ल करने की...🏚️🥀🥺
हमारा क़त्ल करने की उनकी साजिश तो देखो,
गुजरे जब करीब से तो चेहरे से पर्दा हटा लिया।
पर्दा-ए-लुत्फ़ में ये ज़ुल्म-ओ-सितम क्या कहिए,
हाय ज़ालिम तेरा अंदाज़-ए-करम क्या कहिए।
इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का,
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम।
सलीका तुमने परदे का बड़ा अनमोल रखा है,
यही कातिल निगाहें हैं इन्हीं को खोल रखा है।
कैसे बयान करें सादगी अपने महबूब की,
पर्दा हमीं से था मगर नजर भी हमीं पे थी।
सरक गया जब उसके रुख से पर्दा अचानक,
फ़रिश्ते भी कहने लगे काश हम भी इंसान होते।
Comments
Post a Comment